OM

OM

मेरी जहां तक सोच है वहां तक सत्य तो यह है कि परमात्मा कोई हाथ में डंडा लेकर किसी बड़े सिंहासन पर बैठा अकौकिक पुरुष नहीं है जो अपनी संतानों को दंड और पुरष्कार दे रहा है| जैसी अपनी सोच होती है वैसी ही परिस्थितियों का निर्माण हो जाता है| हमारे विचार और सोच ही हमारे कर्म हैं| सृष्टि में जो कुछ भी घटित हो रहा है वह अपन सब के विचारों की ही घनीभूत अभिव्यक्ति है| उस परम तत्व से एकाकार होकर उसके संकल्प से जुड़कर ही आप कुछ सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं| उस परम तत्व से जुड़ना ही सबसे बड़ी सेवा है जो कोई किसी के लिए कर सकता है|

परमात्मा तो एक अगम अचिन्त्य परम चेतना है| हम उससे पृथक नहीं हैं| वह ही यह लीला खेल रहा है| कुछ लोग यह सोचते हैं कि परमात्मा ही सब कुछ करेगा और वही हमारा उद्धार करेगा| पर ऐसा नहीं है| आपकी उन्नत आध्यात्मिक चेतना ही आपकी रक्षा करेगी|

यह एक ऐसा विषय है जिस पर उन्हीं से चर्चा की जा सकती है जिन के ह्रदय में कूट कूट कर प्रेम भरा है और जो पूर्ण समर्पित होना चाहते हैं| नियमित ध्यान और भक्ति से मार्गदर्शन मिलता है पर यह स्वयं को करनी पडती है| कोई दूसरा आपको मुक्त करने नहीं आएगा| अपनी मुक्ति का मार्ग स्वयं को ही ढूंढना पड़ेगा|

न तो शैतान और न ही कोई दुरात्मा आपको प्रभावित कर सकता है जब तक आप स्वयं ही नहीं चाहें| ये सब बातें लोग करते हैं दूसरों पर दोषारोपण करने के लिए और अपने दायित्व से परे भागने के लिए| सारे दु:ख और कष्ट आते ही हैं व्यक्ति को यह याद दिलाने के लिए कि आप गलत दिशा में अग्रसर हो| अपनी परिस्थितियों के लिए आप स्वयं जिम्मेदार हैं और आप स्वयं ही अपने स्वयं के प्रयास से स्वयं को मुक्त करो|
ओ३म शिव|

Image | This entry was posted in Uncategorized. Bookmark the permalink.

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s